10 नवंबर 2019 - 11:55
विज्ञान की डगर, ईरान का सफ़रः दुनिया में सबसे ज़्यादा बिकने वाली दवा का ईरान में उत्पादन, इस नई दवा का नाम है सीनोरा

ईरान प्राचीन समय से ज्ञान विज्ञान का देश रहा है। इस समय भी विभिन्न वैज्ञानिक क्षेत्रों में ईरानी विद्वानों और शोधकर्ताओं की मूल्यवान उपलब्धियां सामने आ रही हैं।

मिसाल के तौर पर 2015 में दुनिया में विज्ञान के क्षेत्र में कुल प्रगति की 1 दश्मलव 53 फ़ीसद प्रगति ईरान ने की है। इंजीनियरिंग टेक्नालोजी ग्रुप, मेडिकल ग्रुप और फिर कृषि विज्ञान ग्रुप ने ईरान में क्रमशः सबसे ज़्यादा प्रगति की।             

हम आपको दुनिया में सबसे ज़्यादा बिकने वाली दवा के ईरान में 25 अक्तूबर 2016 को हुए उत्पादन के बारे में बताने जा रहे हैं। इस दवा पर अमरीका का एकाधिकार था। इस नई दवा का नाम सीनोरा है जो बहुत ही जटिल प्रौद्योगिकी के ज़रिए बनने वाली सबसे ज़्यादा आधुनिक दवाओं की नस्ल में शामिल है। इस दवा का ईरान के अलबुर्ज़ प्रांत में स्वास्थय मंत्री और सिनाजेन कंपनी के अधिकारियों की मौजूदगी में लोकार्पण हुआ। सिनोरा दवा मोनोक्लोनल एंटीबॉडी दवा है। इस दवा से ज्वाइंट, त्वचा और पाचन तंत्र से जुड़ी ऑटो इम्यून बीमारियों का इलाज होता है। 

ऑटो इम्यून बीमारियां उस समय होती हैं जब जिस्म का बीमारियों से लड़ने वाला प्रतिरक्षी तंत्र बाहरी तत्वों के बजाए अपने ही जिस्म के स्वस्थ ऊतकों को नुक़सान पहुचाने लगे। आम तौर पर प्रतिरक्षी तंत्र,  माइक्रोब और इन्फ़ेक्शन से जिस्म की रक्षा करता है।

डायबिटीज़-टाइप वन, रूमटाइड अर्थराइटिस अर्थात संधिवात गठिया, लूपस, एम एस, ग्रेव्ज़ डिज़ीज़, सिलियाक डिज़ीज़, सोरेसिस इत्यादि ऑटो इम्यून बीमारियां हैं। इनमें से ज़्यादातर बिमारियां क्रॉनिक अर्थात पुरानी होती हैं, लेकिन बीमारी के हमले के मद्देनज़र इन्हें नियंत्रित किया जा सकता है। इनमें से लगभग 80 फ़ीसद बीमारियां ऐसी हैं जिनके सिम्पटम्स या लक्षण एक जैसे लगते हैं इसी वजह से बीमारी को चिन्हित कर पाना मुश्किल होता है। इसी तरह मुमकिन है इन ऑटो इम्यून बीमारियों में से कई एक के लक्षण एक साथ जिस्म पर प्रकट हों। आम तौर पर ऑटो इम्यून बीमारियों के लक्षण बेहतरी और बिगड़ने के बीच ऊपर नीचे होते रहते हैं।

यह बीमारी ज़्यादातर परिवारों में देखी गयी है और इसकी चपेट में आने वालों में 75 फ़ीसद औरतें होती हैं। इसी तरह अफ़्रीक़ी मूल के अमरीकियों और मूल अमरीकी निवासियों के इस बीमारी से ग्रस्त होने का ख़तरा अधिक देखा गया है।  

ऑटो इम्यून बीमारी का कारण स्पष्ट नहीं है। बैक्टेरिया, वायरस, कुछ दवाओं, केमिकल स्टिम्यलस और इन्वायरमेन्टल स्टिम्यलस को एक विचार की हद तक इस बीमारी का कारण बताया गया है। अगर परिवार के किसी एक सदस्य को यह बीमारी हो जाए तो बाक़ी सदस्यों के भी इसकी चपेट में आने की संभावना बनी रहती है। जिस तरह ऑटो इम्यून बीमारी कई तरह की होती है उसी तरह इनके सिम्पटम भी अलग अलग होते हैं। थकन, कमज़ोरी और बुख़ार इस बीमारी के आम लक्षण हैं। ऑटो इम्यून बीमारियों से जिस्म के बहुत से अंग प्रभावित होते हैं। इस बीमारी से त्वचा, जोड़, ख़ून की लाल कोशिका, मांसपेशी, रक्त धमनी, कनेक्टिव टिश्यू और एन्डोक्रेन सबसे पहले प्रभावित होते हैं।         

जैसा कि शुरु में हमने कहा कि सिनोरा दवा मोनोक्लोनल ऐन्टी बॉडी दवा है और इस दवा से ज्वाइंट, त्वचा और पाचन तंत्र से जुड़ी ऑटो इम्यून बीमारियों का इलाज होता है। ईरान सिनोरा दवा का उत्पादन करने वाला दुनिया में दूसरा देश है। इस दवा की नई प्रोडक्शन लाइन जल्द ही शुरु होगी ताकि जो लोग इसे लगातार इस्तेमाल करते हैं उन्हें इसे प्राप्त करने में आसानी हो।       

दुनिया के ज़्यादातर देशों की तरह ईरान में भी इस दवा का उत्पादन नहीं होता था। ईरान को यह दवा आयात करनी पड़ती थी लेकिन अब वह इस दवा को बनाने में सक्षम हो गया है और बहुत ही उचित क़ीमत पर बीमारों को मुहैया करता है। ईरान के खाद्य व दवा संगठन के प्रमुख के मुताबिक़, इस दवा को बनाने की प्रौद्योगिकी तुर्की और मलेशिया को स्थानांतरित करने की संभावना मौजूद है। रूस के स्वास्थ्य मंत्री ने भी सिनाजेन कंपनी का दौरा किया जहां इस दावा का उत्पादन होता है और भविष्य में इसके निर्यात होने की संभावना बनेगी।